Harish Jharia

Translate this article in your own language...

Search This Blog

18 December 2009

eNovel:Patthar Kii Ibaarat (Script of Stone): Episode- 1

Patthar ki Ibaarat

Exclusively written for “Discover Life”
----------------------------------------------------------------
Copyright © 2009 [Harish Jharia] All Rights Reserved
----------------------------------------------------------------

उपन्यास: पत्थर की इबारत, एपीसोड- 1

© Harish Jharia

सुबह की पहली किरण फूटने के साथ ही आहिस्ता-आहिस्ता जंगल का अंधियारा छंटता जा रहा था। चौकोर पत्थर की शिला पर एक अठारह वर्षीय भीमकाय युवक परमा बैठा हुआ पहाड़ियों के पीछे से झांकती सूरज की लालिमा को एकटक देख रहा था। उसके चारों ओर बियाबान जंगल था और ठीक सामने बह रही थी एक चौड़े पाटों वाली तीन पुरुष गहरी नदी बुदनी। कंचन निर्मल पानी पर हलकी बयार से नन्हीं-नन्हीं लहरें उठकर पानी के बहाव का संकेत दे रही थीं। जैसे जैसे सूरज की आभा क्षितिज के ऊपर छाती जा रही थी वैसे-वैसे परमा का चेहरा, उसकी आकृति और पोशाक स्पष्ट होती जा रही थी। घने पेड़ों के बीच का अंधेरा हटता जारहा था और हरी घास और उलझी हुई झाड़ियों के बीच से निकाली गई पगडंडियां स्पष्ट होती जा रही थीं। परमा की नज़रें  सूरज की आभा से हटती हुई बुदनी के पानी की महीन लहरों पर ठहर गईं, जिनसे परावर्तित होकर सूरज की रोशनी इंद्रधनुषीय सात रंगों में विभक्त होकर आहिस्ता-आहिस्ता बहते पानी की सतह पर बिखर रही थी।

परमा के मुख पर गहन आस्था पूर्ण मुस्कुराहट प्रकट हुई, उसकी आंखों की पलकें श्रद्धा में झुकीं, उसने दौनों हाथ जोड़कर सूरजदेव और बुदनीमाई को प्रणाम किया, फ़िर कुछ क्षण वह अपने होठों से बुदबुदाता रहा। जब उसने अपनी बड़ी-बड़ी आंखें खोलीं और उठकर खड़ा हुआ तो ऐसा लगा कि उसके विशालकाय शरीर ने सुबह की सुर्ख रोशनी को ढक लिया हो। उसके शरीर का तांबिया रंग  सुबह के उजाले में दमक रहा था। कमर से ऊपर उसका शरीर उघाड़ा था और कमर से नीचे उसने सूती कपड़े की परधनी पहन रखी थी। उसने अपने बांए हाथ में मोटे बाँस का भारी और मज़बूत धनुष थाम रखा था जिसपर जानवर के तांत की प्रत्यंचा चढ़ी हुई थी।  पीठ पर लकड़ी का तरकश चमड़े की चौड़ी पट्टी से बंधा हुआ था  और कमर पर कसे चमड़े के पट्टे से एक छुरी और एक तेज़ धार वाली कुल्हाड़ी लटकी हुई थी। उसके हाथ और पैर के नाखून दो अंगुल लम्बे और आगे की तरफ़ नुकीले थे। पैरों के पंजे और हाथों की हथेलियां सख्त, भारी और खुरदरी थीं। पैरों के पंजों से लेकर पिंडलियों के ऊपर तक चमड़े की संकरी पट्टियां खींचकर लपेटी हुई थीं। परमा के चेहरे पर हल्की मूछों की रेख उग आई थी और उसके उलझे हुए बाल कानों तक झूल रहे थे। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास की आभा दमक रही थी और आंखों में शिकारियों का चौकन्नापन और द्रृढता मौजूद थी।

जैसे-जैसे सुबह की रोशनी फ़ैलती जा रही थी वैसे-वैसे परमा और भी चौकन्ना होता जा रहा था। उसकी आंखें नदी के तट पर हिरनों के झुंड के आने की बेचैनी से प्रतीक्षा कर रही थीं। तभी उसके कान, जानवरों के चलने से होनेवाली सूखे पत्तों की खरखराहट से खड़े हो गए। उसने पल भर मे तरकश से तीर निकाल कर कमान पर चढ़ा लिया, एक पैर आगे रखा, दूसरा पैर पीछे फ़ैलाया और थोड़ा सा झुक कर हमले के लिए चाक-चौबंद हो गया। उसने देखा कि उसके शिकार का झुंड आहिस्ता-आहिस्ता नदी के पानी की ओर बढ़ रहा है। शिकार के नियमों के आधार पर उसे तब तक प्रतीक्षा करनी थी जब तक कि जानवर पानी पीना शुरू ना कर दें। जानवर सुबह की निस्तब्धता में अधिक चौकन्ने नहीं थे उन्होंने शीघ्र ही पानी पीना आरंभ कर दिया। 

यही परमा की कठिन परीक्षा की घड़ी थी। उसने अपना ध्यान केन्द्रित करने का प्रयास किया, गहरी सांस भरी, पीछे के पैर के घुटने को ज़मीन पर टिकाया, कमान वाला हाथ आगे की ओर पूरा ताना और दूसरे हाथ से तीर कमान पर रखकर अपने कान तक खींच लिया। उसने निशाना साधा और तीर छोड़ दिया। तीर सही निशाने पर लगा तो परमा को संतोष हुआ कि उसके परिवार के लिये अगले दो-तीन दिन के भोजन का प्रबंध हो गया था।

आहिस्ता-आहिस्ता सूरज क्षितिज से पूरी तरह निकलकर आकाश में दमकने लगा था। जंगल के जानवर रोज़ की तरह विचरण करने और कुलाचें भरने लगे थे। नदी के पानी की सतह पर बत्तखों ने तैरना आरंभ कर दिया था और पक्षियों का कलरव वतावरण में सगीत घोलने लगा था। 

फिर अंधकार धीरे-धीरे पेड़ों के नीचे सिमटगया। परमा ने अपने शिकार को अपने दौनों कंधों पर लादा और मद्ध्म कदमों से शिकारगाह से वापस चला गया।

-------------------------------------------------------------------------------------
Links to Episodes of “Patthar Kii Ibaarat”:
Opening Page:  Preface:  Introduction:  Episode-1:  Episode-2:  Episode-3:  Episode-4:  Episode-5:  Episode-6:  Episode-7:  Episode-8:  Episode-9: Episode-10: : Episode-11: Episode-12: Episode-13; Episode-14  
---------------------------------------------------------------------------------
Synonyms of Hindi words:
शिकार= prey; आभा= splendor; खेरमाई= goddess of village territory; मढ़िया= small temple; छप्पर= roof; ताड़= palm; ढाल= slope; परछी= shed; बल्लियों, मलगे = wooden logs; धांसकर= rammed into; खम्भों= pillars; करेले- bitter gourd; बेलें= creeper; पंजर= skeleton; झौंपड़ा= thatched hut; बांस= bamboo; टटिया= bamboo-mesh; अंधड़ों= strong wind; परोसने= serving food; खूरने= stir; कड़छी= serving spoon; चटुआ= wooden spatula; कल्ला= earthen pan; पृष्ठभूमि= background; पहाड़ी= hill; झरना= spring; सोते= cascade; बया= Indian tailor bird; अड़िया= wooden-log barrior, लोमड़ियां= fox
---------------------------------------------------------------------------------
Caution:
This creative work has been originally written by the author Harish Jharia who is the sole owner of the text and this intellectual property. This has been published on the personal Blog “Discover Life” of Harish Jharia at the URL: http://harishjhariasblog.blogspot.com/. No hyperlink to this novel “Patthar ki Ibaarat” (Script of Stone) has been provided nor any permission granted to any person, organization or site whomsoever, by the writer and owner of the copyright of this novel that is Harish Jharia. This novel has been published on the blog “Discover Life” for the visitors to this blog for their healthy reading and intellectual entertainment. It is hereby warned that the novel in whole, in part or as extracts should not be copied and or reproduced neither on internet, nor written on CDs nor printed on books, magazines newspapers and or in any media. Legal and or criminal proceedings will be initiated against defaulters by the author and the owner of this intellectual property.

- Harish Jharia

--------------------------------------------------------------------------------------
Disclaimer:
This article / Story / fiction is written based on my personal observations. My intention for publishing the same is to provide healthy reading and intellectual entertainment and not for educating the visitors. Names of people, societies, communities and description of faiths, beliefs, incidents are imaginary and fictitious. They have neither any relevance to the prevailing entities and traditions nor have any similarities with ongoing lifestyles, political ideologies and legal doctrines. The contents of this creative work have not been written with any intention to criticize, condemn or oppose anything what-so-ever present in reality in any country in the world. No literature or authentic books have been referred for writing the contents of this article. The visitors are advised not to refer the contents of this article for any research or testimony on scientific, geographical, political, civic, social or legal purposes. The visitors are further advised to consult relevant experts before adapting any information from this article. The author or the website are not responsible for any errors, mistakes, or omissions there in.- Harish Jharia

----------------------------------------------------------------------------------
npad

No comments:

Post a Comment