Harish Jharia

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26 July 2012

Audio Message of Rajesh Khanna: Rajesh Khanna left a recorded farewell message for fans ‎




Superstar Rajesh Khanna Is No More: He Leaves Behind a Recorded Message for His Admirers

- Harish Jharia

Here is the brief, edited and compiled transcript of the historic message recorded by Rajesh Khanna, somewhere before he breathed his last....
This recording was first played at the time of his ‘chouth’ (4th day after death) and released to the media, by his family members for the visitors who visited them for offering their last respect to the departed soul:

मेरे प्यारे दोस्तों, भाइयो और बहिनों, नास्टेल्जिया में (यादों के सहारे) जीने की आदत नहीं है मुझे. हमेशा भविष्य के बारे में ही सोचना पड़ता है. जो दिन गुजर गया है, बीत गया है, उसका क्या. सोचना. लेकिन, जब जाने पहचाने चेहरे अनजान से एक महफ़िल में मिलते हैं, तो यादें वापस ताज़ा हो जाती हैं.
मेरा जनम थियेटर से हुआ, मैं आज जो कुछ भी हूँ... ये स्टेज... ये थियेटर की बदौलत हूँ. मैं जब फिल्मों में आया तो मेरा कोई गाडफादर नहीं था, कोई रिश्तेदार नहीं था, कोई सर पर हाथ रखनेवाला नहीं था.
मैं आया था यूनाईटेड प्रोड्यूसर्स फिल्मफेयर टैलेंट कांटेस्ट के थ्रू. हमको बुलाया गया था टाइम्स आफ इंडिया में. वहाँ पर बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स थे. चाहे वो चोपड़ा साहब थे, बिमल राय थे, शक्ति सामंत थे... बहुत सारे थे.
उन्होंने कहा कि हमने आपको डायलाग भेजे थे, वो याद किए आपने?
मैं सामने बैठा था और वो एक बड़ी सी टेबिल पर लाइन में बैठे थे. मुझे ऐसा लग रहा था कि कोर्टमार्शल हो रहा है, जैसे अभी ये बन्दूक निकालेंगे और मुझे मार देंगे.
मैंने कहा कि डायलाग तो याद है लेकिन ये जो डायलाग है, ये आपने नहीं बताया कि इसका कैरेक्टारईजेशन (चरित्र-चित्रण) क्या है, कि ये हीरो जो है वो अपनी माँ को बताता है कि “मैं एक नाचनेवाली से शादी करना चाहता हूँ और उसको तेरे घर की बहू बनाना चाहता हूँ.”
मैंने कहा, आपने ना कैरेक्टर बताया माँ का, ना हीरो का, कि भाई, अमीर है, गरीब है, माँ सख्त है, कड़क है, नरम है, मिडिल क्लास है, आदमी पढ़ा-लिखा… अनपढ़ है?
तो चोपड़ा साहब ने झट से कहा कि “आपाप थिएटर से हो?” ये तो कोई स्टेज का एक्टर ही बोल सकता है.
“हाँ जी” मैंने कहा “डायलाग तो आपने भेज दिया कि किस तरह माँ को कन्विंस करना है; डायलाग बोलना है; मगर आपने कैरेक्टराईजेशन (चरित्र-चित्रण) नहीं बताया”.
तो बोले “ठीक है… अच्छा है तुम कोई अपना ही डायलाग सुनाओ”.
अब काटो तो खून नहीं, पसीना छूट रहा था. मैंने कहा क्या डायलाग बोलूँ. मेरे सामने सब बड़े-बड़े लोग, जिनकी पिक्चर  १०-१० बार देखे हैं... प्रोड्यूसर-डायरेक्टर हैं.  
वो डायलाग, जिसकी वजह से मैं फिल्मों में आया, मुझे जी.पी. सिप्पी ने चांस दिया ४० साल पहले, वो था ... “हाँ कलाकार हूँ, हाँ मैं कलाकार हूँ ... ... ...  क्या करोगे मेरी कहानी सुनकर... ... ... ”.
फिल्मों में आ तो गया, लेकिन आने के बाद, वो खूबसूरत कामयाबी की सीढ़ी चढने का मौक़ा मिला, यह सेहरा आपके सर है. वो आप हैं जिन्होंने मुझे एक्टर से स्टार बनाया, स्टार से सुपर स्टार बनाया. किन अल्फाजों में आपका शुक्रिया अदा करूँ, मुझे समझ नहीं आया.
प्यार आप मुझे भेजते रहे, वो प्यार मुझे मिलता रहा. उस प्यार को मैं कभी वापस लौटा नहीं पाया. लेकिन जो भी कहना चाहूँगा, जिन अल्फाजों में भी... मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहूँगा, वो मेरे दिल की सच्चाई होगी, मेरी ईमानदारी होगी, मेरा ज़मीर होगा.
आज मेरा दिल हल्का हुआ, आपसे बात करके, कि आपका मैंने शुक्रिया अदा किया. मुझे खुद को अच्छा लग रहा है, कि चलो इस बहाने आपसे मुलाक़ात हुई.
जिसे अपना कहें, कोई इस काबिल नहीं मिलता,
यार पत्थर तो बहुत मिले हैं, मगर दिल नहीं मिलता.
दोस्तों, आपका एक हिस्सेदार मैं भी हूँ. और जैसे मैंने पहले भी कहा “हां...! कि आप अपना कीमती वक्त निकालकर आए... और आपका ये प्यार था कि इतनी बड़ी संख्या में आप मौजूद हुए.
मैं यही कहूँगा कि बहुत-बहुत शुक्रिया, थैंक यूं और मेरा बहुत बहुत सलाम. 

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npad

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