Harish Jharia

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02 September 2012

Manglik Syndrome (मांगलिक दोष): The deadliest superstition that left thousands of Hindu girls unmarried


मांगलिक दोष: एक सर्वाधिक घातक अंधविश्वास जिसने हज़ारों हिंदू कन्याओं को आजीवन अविवाहित रहने पर मजबूर कर दिया है... 

© Harish Jharia 

हमारे आपके जैसे आम लोग जब मांगलिक दोष पर आँख मूँद कर विशवास करते है और ऐसे भयभीत हो जाते हैं जैसे कि हम दुनियाँ के सबसे बड़े पापी हों. ऎसी हालत में जिस ज्योतिषी के पास हम जाएंगे वह क्यों नहीं कहेगा कि हमारी सारी परेशानियां और संकट मंगली होने के कारण हैं...

ज्योतिषी के पास कोई चमत्कार या जादू कि छडी नहीं होती है यह जानने के लिए कि आप मांगलिक हैं या नही. उसे आपके जन्म की तारीख, जन्म का समय और जन्म के स्थान की ज़रूरत होती है. फिर वह इस डेटा को पंचांग की टेबल्स से मिलाता है और आपकी जन्मपत्री / कुंडली (बर्थ चार्ट) बनाता है. कुंडली में १२ राशियों के १२ खाने होते हैं जिनमें अलग-अलग गृह समय बीतने के साथ आते-जाते रहते हैं. 
  

जितने समय तक इस कुंडली के घर नंबर १, २, ४, ७ और १२ में मंगल आकर ठहरा रहता है उस दौरान पैदा होने वाले लोगों को मांगलिक या मंगली होने का ठप्पा लगा दिया जाता है. अगर आपके जन्म के समय आपकी कुंडली में मंगल की ऎसी स्थिति रहती है तो आप पर मांगलिक होने का अमानवीय और आधारहीन आरोप लगा दिया जाता है. आप एक प्रकार से बिना किसी कारण के अंधविश्वासी लोगों द्वारा अछूत कारार दे दिए जाते हैं. यह बौद्धिक पिछडेपन की पराकाष्ठा है. 

मांगलिक दोष जैसे अंधविश्वासों के कारण ही हिन्दू आज भी दुनियाँ में सबसे अधिक पिछड़े समाजों में एक माना जाता है. 

आपको अपनी कुण्डली बनवाने के लिए किसी ज्योतिषी के पास जाने की ज़रूरत नहीं है. ऑनलाइन कुंडली कैलकुलेटर में अपनी डेटा एन्टर करिए और अपनी कुंडली खुद ही बनाइए. मगर सावधान कुण्डली में लिखी भविष्यवाणी पर कतई भरोसा नहीं करें और अगर उसमें आपको  मांगलिक दोष बताया जाता है तब भी कतई विशवास नहीं करे. 

इस कुण्डली बनानेवाली साईट का लिंक आपको इस लिए दिया जा रहा है ताकि आपके दिमाग से यह गलतफहमी दूर हो जाय कि पण्डे-पुरोहित कुण्डली बना कर कोई बहुत बड़ा चमत्कार करते हैं. यह सब पहले से ही कैल्कुलेट किया हुआ और तय होता है. बस जन्म की तारीख, समय और स्थान के हिसाब से हर व्यक्ति की विशिष्ठ कुण्डली अपने-आप निकल आती है; चाहे वह आप निकालें या पंडित... दौनों की निकाली हुई कुण्डलियाँ बिलकुल एक सी होती हैं.

Click here:
इस लिंक पर क्लिक करें और अपना मांगलिक होना / ना होना तय करें ... मगर उसपर विश्वास नही करें: http://www.mywebastrologer.com/horo/horoform.aspx

कुण्डली पूर्ण रूप से आपके जन्म की तारीख, समय और स्थान पर आधारित होती है. मज़े की बात है कि उसमें आपके किए हुए कर्म, चाहे वह पाप हों या पुण्य, का प्रभाव नहीं पड़ता. जन्म के एक ही डेटा वाले पुण्यात्मा और जघन्य पापी की कुण्डलियां बिलकुल एक सी ही होती हैं. अगर ऐसा है तो कुण्डली को लेकर इतना परेशान होने की क्या ज़रूरत है? इसको तो सिर्फ एक परम्परा का निर्वाह करने मात्र के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए और बिलकुल भी गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए. 

ये जो कुंडली बनाई जाती हैं, इनमें १२ राशियों (खानों) में ९ गृहों (प्लैनेट्स) की स्थिति दर्शाई जाती है. कुंडलियों में जो ९ गृह (नव गृह) दर्शाए जाते है वे निम्नलिखित है:  
  1. Sun – सूर्य (Surya) 
  2. Moon - चन्द्र (Chandra)
  3. Mercury - बुध (Budha) 
  4. Venus - शुक्र (Śukra) 
  5. Mars - मंगल (Maṅgala) 
  6. Jupiter - बृहस्पति (Bṛhaspati) 
  7. Saturn - शनि (Śani) 
  8. Dragons Head – राहू (Rahu) 
  9. Dragons Tail-  केतु (Ketu)
विज्ञान के अनुसार हिन्दू कुण्डली में दर्शाए गए गृहों में केवल ५ ही गृह माने जा सकते हैं वे है: Mercury - बुध, Venus - शुक्र, Mars - मंगल, Jupiter – बृहस्पति और Saturn - शनि.  Sun – सूर्य प्लेनेट नहीं तारा (स्टार) है. Moon - चन्द्र भी गृह नहीं उपगृह (natural satellite) है. राहू और केतु २ काल्पनिक अस्तित्व हैं जिनका ज़िक्र धार्मिक कहानियों में किया गया है. राहू और केतु जैसे कोई प्लेनेट या पिण्ड खगोलीय ब्रह्मांड में  मौजूद नहीं हैं. 

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8 comments:

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